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Friday, August 23, 2013

Tujhe paane ki hasrat liye

तुझे पाने की हसरत लिए हमें एक जमाना हो गया !
नई नई शायरी, करते तेरे पीछे,
देख मैं शायर कितना पुराना हो गया !
मुए इस दिल को संभालना पड़ता है हर वक़्त !
दिल न हुआ गोया बिन पजामे का नाड़ा हो गया !
मर्ज में न फर्क, तोहफों में खर्च अलग !
इलाज में खाली सारा, अपना खज़ाना हो गया !
दिल दर्द से भरा, और जेबें खाली !
ग़म ही इन दिनों, अपना खाना हो गया !
मुद्दतें हो गई, रोग जाता नहीं दिखता,
अस्पताल ही अब अपना, ठिकाना हो गया !
तू भी तो बाज़ आ कभी, इश्कियापन्थी से...
पागल भी देख तुझे, कब का सयाना हो गया !

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